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एटीएम में रखे ये सावधानिया

एटीएम में रखे ये सावधानिया
एटीएम में रखे ये सावधानिया

सावधान रहे अपने एटीएम कार्ड   को सावधानी पूर्वक उपयोग करे 

क्या करें

  • अपना एटीएम लेनदेन पूर्ण गोपनीयता से करें, अपनी व्यक्तिगत पहचान संख्या (एटीएम पासवर्ड) दर्ज करते हुए उसे कभी भी किसी भी व्यक्ति को न देखने दें।
  • लेनदेन पूर्ण होने के बाद यह सुनिश्चित करें कि एटीएम स्क्रीन पर वेलकम स्क्रीन दिखाई दे रही है।
  • सुनिश्चित करें कि आपका वर्तमान मोबाइल नम्बर बैंक के पास रजिस्टर्ड है जिससे आप अपने सभी लेनदेनों के लिए अलर्ट संदेश प्राप्त कर सकें
  • एटीएम के आसपास संदेहजनक लोगों की हलचल या आपको बातों में उलझाने वाले अजनबी व्यक्तियों से सावधान रहें।
  • एटीएम मशीनों से जुड़े हुए ऐसे अतिरिक्त यंत्रों को देखें जो संदेहस्पद दिखाई देते हों।
  • यदि एटीएम / डेबिट कार्ड गुम गया हो या चुरा लिया गया हो, तो इसकी सूचना तुरंत बैंक को दें, यदि कोई अनधिकृत लेनदेन हो, तो उसे रिपोर्ट करें।
  • लेनदेन संबंधी अलर्ट एसएमएस और बैंक विवरणों की नियमित रूप से जाँच करें।
  • यदि नकदी संवितरित नहीं की गई हो और एटीएम में “नकदी खत्म”/”cash out” दर्शाया नहीं गया हो, तो नोटिस बोर्ड पर लिखे टेलीफोन नम्बर पर उसकी सूचना दें।
  • आपके खाते से राशि डेबिट करने के लिए फोन पर आए एसएमएस की तुरंत जाँच करें।

क्या न करें

  • कार्ड पर अपना पिन नम्बर न लिखें, अपना पिन नम्बर याद रखें।
  • अजनबी व्यक्तियों की सहायता न लें। कार्ड का उपयोग करने के लिए अपना कार्ड किसी भी व्यक्ति को न दें। • बैंक कर्मचारियों एवं परिवार के सदस्यों सहित अपना पिन किसी भी व्यक्ति को न बताएं।
  • जब आप भुगतान कर रहे हों, तब कार्ड को अपनी नजरों से दूर न होने दें।
  • लेनदेन करते समय, आप मोबाइल फोन पर बात न करें।

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Final Words

आशा करते है दोस्तों आपको हमारी पोस्ट एटीएम में क्या सावधानी रखना चाहिये और एटीएम में लेनदेन करते समय क्या करे क्या न करे और atm से जुडी हुयी जानकारी आपको पसंद आई होगी यदि आपके कोई सवाल है तो आप हमसे पूछ सकते है हमे आपके सवालो के जवाब देने में बहुत ख़ुशी होगी

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पोस्ट को पढने के लिए आप सभी का धन्यबाद

ऑनलाइन एटीएम के लिए कैसे अप्लाई करे

ऑनलाइन एटीएम के लिए कैसे अप्लाई करे

दोस्तों आज कल एटीएम हमारे  लिए  बहुत ही जरुरी चीज़ बन गया बन  गया है और हम दिन रात इसका  यूज़ कर  रहे है कही  न कही एटीएम कार्ड का होना हमारे लिए बहुत important  हो गया है

आजकल  की बिजी लाइफ में एटीएम ने हमें बहुत सारी दी  है for example : मनी ट्रांसफर बिल रिचार्ज जो  की बहुत easily हम use कर सकते है

वैसे तो  आप  बैंक में जाकर भी atm कार्ड के लिए अप्लाई कर सकते है लेकिन  आज हम आपको बताएँगे  online atm कार्ड के लिए  सकते है

दोस्तों अगर आपको  ऑनलाइन atm  कार्ड के लिए apply है तो सबसे   पहले आपके online sbi  की net  बैंकिंग होनी चाहिए उससे  बहुत आसानी से ATM  कार्ड के  पाएंगे

निचे कुछ स्टेप्स दी गयी  है उन्हें आप फॉलो करे

  •  सबसे पहले online sbi में लॉगिन करे
  • उसके  बाद आप e -services मेनू में क्लिक करना है करना है

  • E-services में क्लिक में करने के बाद आपको left side में atm card services का  ऑप्शन दिखाई देगा

  • इसके बाद आप यदि आपका पहले  से कोई एटीएम कार्ड  है तो आप उसमे अपने कार्ड को ब्लॉक  करना उसकी लिमिट सेट करना है

अपने new atm card को एक्टिवेट कर सकते है  हम उसमे से request new atm कार्ड पर क्लिक करेंगे तो हमे ये option दिखाई देंगे

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ये फॉर्म होगा आपको ये details fill करने के बाद फॉर्म को है आपको कुछ दिन आपके address me आपका एटीएम कार्ड पोस्ट कर दिया जायेगा

राजा बलि और लक्ष्मी मां ने शुरू की भाई-बहन की राखी

एक सौ 100 यज्ञ पूर्ण कर लेने पर दानवेन्द्र राजा बलि के मन में स्वर्ग का प्राप्ति की इच्छा बलवती हो गई तो का सिंहासन डोलने लगा। इन्द्र आदि देवताओं ने भगवान विष्णु से रक्षा की प्रार्थना की। भगवान ने वामन अवतार लेकर ब्राह्मण का वेष धारण कर लिया और राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुँच गए। उन्होंने बलि से तीन पग भूमि भिक्षा में मांग ली।

बलि के गु्रु शुक्रदेव ने ब्राह्मण रुप धारण किए हुए विष्णु को पहचान लिया और बलि को इस बारे में सावधान कर दिया किंतु दानवेन्द्र राजा बलि अपने वचन से न फिरे और तीन पग भूमि दान कर दी।

वामन रूप में भगवान ने एक पग में स्वर्ग और दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लिया। तीसरा पैर कहाँ रखें? बलि के सामने संकट उत्पन्न हो गया। यदि वह अपना वचन नहीं निभाता तो अधर्म होता। आखिरकार उसने अपना सिर भगवान के आगे कर दिया और कहा तीसरा पग आप मेरे सिर पर रख दीजिए। वामन भगवान ने वैसा ही किया। पैर रखते ही वह रसातल लोक में पहुँच गया।

जब बलि रसातल में चला गया तब बलि ने अपनी भक्ति के बल से भगवान को रात-दिन अपने सामने रहने का वचन ले लिया और भगवान विष्णु को उनका द्वारपाल बनना पड़ा। भगवान के रसातल निवास से परेशान लक्ष्मी जी ने सोचा कि यदि स्वामी रसातल में द्वारपाल बन कर निवास करेंगे तो बैकुंठ लोक का क्या होगा? इस समस्या के समाधान के लिए लक्ष्मी जी को नारद जी ने एक उपाय सुझाया। लक्ष्मी जी ने राजा बलि के पास जाकर उसे रक्षाबन्धन बांधकर अपना भाई बनाया और उपहार स्वरुप अपने पति भगवान विष्णु को अपने साथ ले आयीं। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी यथा रक्षा-बंधन मनाया जाने लगा।